आज रात दस बजे पहली बार डिस्टलरी की बदबू पूरे शहर मे फैली और फिर अब रात एक बजे एक बार फिर सेप्टिंक टैंक जैसी बदबू फैलने लगी है। कूलरो और दूसरे माध्यम से यह घरो के अन्दर तक पहुँच तो जाती है पर फिर निकलती नही है। मैने अभी ही कूलर बन्द किया है पर फिर भी कमरे मे दमघोटू माहौल बन रहा है। घर के पीछे एक बीमार व्यक्ति है जो अक्सर बदबू मे मारे बैचैन हो जाता है। और ऊँचे स्वर मे कहता है कि जो भी दोषी हो भगवान उसे बर्बाद कर देना। बडी कडवाहट भरी प्रार्थना होती है। अब उसके उठ जाने की आहट आ रही है। दोषी कौन है सारी जनता जानती है। उन्हे भगवान कब सजा देंगे- इसी की प्रतीक्षा सभी को है। ऐसी प्रार्थनाओ मे बडा दम होता है।
अपडेट
आज तो हद हो गयी। रात के तीन बजे है और एक रात मे तीसरी बार बदबू फैली है। अभी गहरी नीन्द का समय है। घर के लोग हडबडा कर उठ बैठे है। पूरे शहर की यही स्थिति होगी। कूलर एक बार फिर बन्द कर दिये गये।
मेरा घर डिस्टलरी से 15-20 किमी दूर है। जरा सोचे, पास वालो पर क्या बीत रही होगी। क्या हम आजाद भारत मे है?????????
Sunday, May 11, 2008
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1 comments:
बड़ा चिन्तनीय मामला है-एक व्यापक आंदोलन की दरकार है.
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