Friday, May 9, 2008
यदि धरती मे कही नरक है, तो यही है, यही है, यही है
रात के ढाई बज रहे है। छत्तीसगढ की राजधानी रायपुर मे दमघोटू बदबू फैल रही है। शहर गहरी नीन्द से जाग उठा है। यह बदबू है डिस्टलरी की। रात का शैतान फिर से सक्रिय है। यह समझ नही आता कि यह देश आम लोगो का है या उन चन्द लोगो का जिन्होने आम लोगो का चैन छीन रखा है। एक डिस्टलरी से पूरे शहर विशेषकर बच्चो को परेशानी। कोई है जो सुन रहा है आम लोगो की गुहार? सेप्टिक टैंक की गन्दगी से भी बढकर इस बदबू मे आम लोग यही सोच रहे है कि यदि धरती मे कही नरक है, तो यही है, यही है, यही है।
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3 comments:
पंकज जी
आप के वहां प्रदुषण बोर्ड नहीं है क्या? यहाँ महाराष्ट्र में तो ऐसा नहीं देखा मैंने, हाँ पैसे से सब काम हो जाता है लेकिन अगर इतने लोग प्रभावित हैं तो कानो में जूं रेंगनी ही चाहिए प्रशाशन के. किसी टी.वी. वाले को ख़बर कर दो हो सकता है वो ही कुछ मदद करदें आप लोगों की. मदद ना भी करें तो तमाशा तो कर ही देंगे.
नीरज
नीरज जी
प्रदूषण बोर्ड भी है और ऐसा है कि एक फ़ैक्ट्री का ऑन स्पॉट विज़िट किए बिना ही उसे नो ऑब्जेक्शन सर्टीफ़िकेट दे दिया गया, अब आप सोच लो!!
रहा सवाल मीडिया का तो मीडिया वाले भी रायपुर मे ही रहते हैं और अक्सर छापते रहते हैं लेकिन…………
चिन्तनीय है-मिडिया जागा है या हमेशा की तरह सोया है...जगाईये उन्हें..आवाज उठाईये.
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आप हिन्दी में लिखते हैं. अच्छा लगता है. मेरी शुभकामनाऐं आपके साथ हैं, इस निवेदन के साथ कि नये लोगों को जोड़ें, पुरानों को प्रोत्साहित करें-यही हिन्दी चिट्ठाजगत की सच्ची सेवा है.
एक नया हिन्दी चिट्ठा किसी नये व्यक्ति से भी शुरु करवायें और हिन्दी चिट्ठों की संख्या बढ़ाने और विविधता प्रदान करने में योगदान करें.
यह एक अभियान है. इस संदेश को अधिकाधिक प्रसार देकर आप भी इस अभियान का हिस्सा बनें.
शुभकामनाऐं.
समीर लाल
(उड़न तश्तरी)
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