Monday, November 24, 2008

रात तीन बजे प्रदूषको से भर रहा है रायपुर शहर

रात के तीन बज रहे है। पूरे शहर मे अजीब सी गन्ध फैली है। काला धुँआ सब तरफ फैल रहा है। लोग गहरी नीन्द मे है और प्रदूषक साँसो से अन्दर जा रहे है। इस शहर का कोई माई-बाप नही है-ऐसा प्रतीत हो रहा है।

Thursday, October 16, 2008

काली धूल के आगोश मे एक बार फिर रायपुर

चुनाव आचार सन्हिता लगी नही कि स्पांज आयरन सन्यंत्रो से काली धूल का निकलना चालू हो गया है। आम लोगो के घरो के अन्दर तक पैरो मे काली धूल देखी जा रही है। शरद पूर्णिमा के दिन रात को खुले मे रखी गयी खीर भी काली हो गयी। कितनी सारी धूल लोगो के फेफडॉ मे घुस चुकी होगी यह ऊपर वाला ही जानता है। पिछले कुछ महिनो से इसका प्रकोप कम था। चुनाव के बाद कोई भी सरकार आये उसका बिकना तय है। आगे चार साल (अगले चुनाव) तक तो यह सब झेलना ही है पर शुरुआत अभी से हो जायेगी यह सोचा नही था।

Wednesday, June 25, 2008

डिस्टलरी की बदबू रात तीन बजे रायपुर शहर मे

रात के तीन बज रहे है। एक बार फिर सारा रायपुर शहर डिस्टलरी की बदबू की गिफ्त मे है। आम जनता गहरी नीन्द मे है और रिमझिम फुहारो के बीच इस बदबू से बैचैन है। ये हाल है राज्य की राजधानी का है, फिर दूर-दराज मे क्या हो रहा होगा, आप सहज कल्पना कर सकते है।

Saturday, June 21, 2008

दिन-दहाडे डिस्टलरी की बदबू से बेहाल होता रायपुर शहर

रिमझिम फुहार के बाद रायपुर शहर अब सेप्टिंक टैक की बदबू से भरता जा रहा है। दोपहर के पौने चार हो रहे है। डिस्टलरी का ताँडव कुछ दिनो के अंतराल मे फिर चालू हो गया है। दिन दहाडे इस दुस्साहस से आप समझ ही सकते है कि वोट तो जनता देती है पर राज चलता है चन्द शैतानो का जो राजनेताओ को काबू मे रखकर खुलेआम नियमो की धज्जियाँ उडाते है।

Friday, May 16, 2008

सुबह-सुबह डिस्टलरी की बदबू से भरता रायपुर शहर

कौन कहता है कि रायपुर मे रात के अन्धेरे मे प्रदूषण फैलाया जाता है डिस्टलरी का। अभी सुबह के साढे पाँच बजे है और सारा शहर बदबू से भर रहा है। आप की नीन्द इस सडान्ध मे खुले तो आप सोच सकते है कैसा बुरा आप महसूस करेंगे। ये रायपुर है। अन्धेर नगरी, चौपट राजा। यहाँ की यही रीत है।

Wednesday, May 14, 2008

रात दो बजे डिस्टलरी की बदबू फिर से रायपुर मे

रात के दो बज रहे है। डिस्टलरी की बदबू आने लगी है। इसका शहर मे फैलाव हो रहा है। गहरी नीन्द का समय है और लोग कुछ ही देर मे बैचैनी महसूस करने लगेंगे। परसो ही दैनिक छत्तीसगढ नामक अखबार ने इस ब्लाग को प्रकाशित कर आम जनता की परेशानियो को बेबाकी से प्रस्तुत किया था। पर आज फिर यह बदबू --- लगता है राजनेता नीन्द से नही जागे है। बदबू असहनीय होती जा रही है। कैसे पर्यावरण के कानून की धज्जियाँ उडती है और कैसे आम जनता का शोषण होता है- इसे आप रायपुर मे महसूस कर सकते है।

Sunday, May 11, 2008

डिस्टलरी की बदबू और कडवी प्रार्थना का दौर रायपुर मे

आज रात दस बजे पहली बार डिस्टलरी की बदबू पूरे शहर मे फैली और फिर अब रात एक बजे एक बार फिर सेप्टिंक टैंक जैसी बदबू फैलने लगी है। कूलरो और दूसरे माध्यम से यह घरो के अन्दर तक पहुँच तो जाती है पर फिर निकलती नही है। मैने अभी ही कूलर बन्द किया है पर फिर भी कमरे मे दमघोटू माहौल बन रहा है। घर के पीछे एक बीमार व्यक्ति है जो अक्सर बदबू मे मारे बैचैन हो जाता है। और ऊँचे स्वर मे कहता है कि जो भी दोषी हो भगवान उसे बर्बाद कर देना। बडी कडवाहट भरी प्रार्थना होती है। अब उसके उठ जाने की आहट आ रही है। दोषी कौन है सारी जनता जानती है। उन्हे भगवान कब सजा देंगे- इसी की प्रतीक्षा सभी को है। ऐसी प्रार्थनाओ मे बडा दम होता है।


अपडेट
आज तो हद हो गयी। रात के तीन बजे है और एक रात मे तीसरी बार बदबू फैली है। अभी गहरी नीन्द का समय है। घर के लोग हडबडा कर उठ बैठे है। पूरे शहर की यही स्थिति होगी। कूलर एक बार फिर बन्द कर दिये गये।


मेरा घर डिस्टलरी से 15-20 किमी दूर है। जरा सोचे, पास वालो पर क्या बीत रही होगी। क्या हम आजाद भारत मे है?????????